जमीन का नक्शा कटवाने के लिए किसान ने उठाया बड़ा कदम, फिर भी नहीं मिली राहत
अंबिकापुर (सरगुजा): छत्तीसगढ़ के सरगुजा जिले के लखनपुर क्षेत्र से भ्रष्टाचार का एक बेहद भावुक और हैरान करने वाला मामला सामने आया है। यहाँ एक बेबस किसान ने पटवारी पर गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि जमीन का नक्शा दुरुस्त (अपडेट) करने और सीमांकन करने के बदले पटवारी ने उससे 8000 रुपये की घूस (रिश्वत) ली। बेहद दुखद बात यह है कि पैसे ऐंठने के बाद भी किसान की जमीन का न तो सीमांकन हुआ और न ही नक्शा सुधरा। अब वह लाचार किसान अपना हक पाने के लिए सरकारी दफ्तरों की चौखट पर चक्कर काटने को मजबूर है। यह स्थिति तब है जब प्रशासन जनता की शिकायतों को दूर करने के लिए लगातार शिविर लगाने के दावे कर रहा है।
कलेक्ट्रेट पहुंचा पीड़ित, प्रभारी मंत्री की बैठक के दौरान खोली पोल
लखनपुर तहसील के अंतर्गत आने वाले ग्राम गोरता के निवासी पूरन राम अपनी शिकायत लेकर कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचे थे। उस समय जिले के प्रभारी मंत्री वरिष्ठ अधिकारियों के साथ कलेक्ट्रेट में समीक्षा बैठक ले रहे थे। अधिकारियों के सामने अपना दुखड़ा रोते हुए पूरन राम ने बताया कि तहसीलदार न्यायालय की ओर से उनकी जमीन का सीमांकन और नक्शा सुधारने का बकायदा आदेश जारी किया जा चुका है, लेकिन इसके बावजूद हलका पटवारी ने काम करने के एवज में उनसे ₹8000 की रिश्वत ली और काम अटका कर रखा।
2 महीने मेहनत कर बेटे ने बर्फ बेचकर जुटाए थे पैसे
किसान पूरन राम ने बताया कि रिश्वत की यह रकम उनके लिए कितनी बड़ी थी:
"मेरे बेटे ने दो महीने तक हाड़-तोड़ मेहनत की, मजदूरी की और गांव-गांव घूमकर बर्फ बेची, तब जाकर जैसे-तैसे ₹8000 जमा हो पाए थे। जब पटवारी ने काम के बदले पैसों की मांग की, तो हमने वही खून-पसीने की कमाई उसे सौंप दी।"
किसान का कहना है कि अब तक तहसील कार्यालय की दौड़ लगाते-लगाते और कागजी कार्रवाइयों में उनके 40 से 50 हजार रुपये खर्च हो चुके हैं।
पटवारी बदला पर नहीं बदला किसान का नसीब, जमीन पर दूसरों का कब्जा
पीड़ित ने बताया कि जिस पटवारी ने उनसे घूस ली थी, उसका अब वहां से तबादला हो चुका है और उस क्षेत्र में नए पटवारी की पोस्टिंग हो गई है। लेकिन नया पटवारी भी उनकी फाइल को आगे बढ़ाने में कोई रुचि नहीं ले रहा है। पूरन राम पिछले कई सालों से इस समस्या से जूझ रहे हैं। न्याय न मिलने के कारण अब उनकी जमीन पर दूसरे दबंग लोगों ने अवैध रूप से मकान का निर्माण कार्य भी शुरू कर दिया है, जिससे पीड़ित परिवार पूरी तरह दाने-दाने को मोहताज होने की कगार पर है।

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