संचिता सुषमा वाल्के 

भोपाल। मध्य प्रदेश सरकार द्वारा बरकतउल्लाह विश्वविद्यालय का नाम बदलकर "मां बागदेवी भोजपाल विश्वविद्यालय" किए जाने पर विभिन्न सामाजिक एवं सांस्कृतिक संगठनों ने प्रसन्नता व्यक्त की है। श्री हिंदू उत्सव समिति एवं संस्कृति बचाओ मंच ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव तथा राज्य मंत्रिपरिषद का आभार व्यक्त करते हुए इसे सांस्कृतिक गौरव और ऐतिहासिक पहचान से जुड़ा महत्वपूर्ण निर्णय बताया है।संस्कृति बचाओ मंच एवं श्री हिंदू उत्सव समिति के अध्यक्ष चंद्रशेखर तिवारी ने कहा कि वर्षों से विश्वविद्यालय का नाम भारतीय संस्कृति और भोपाल की ऐतिहासिक पहचान से जोड़ने की मांग की जा रही थी, जो अब पूरी हुई है। उन्होंने मुख्यमंत्री और सरकार को इस निर्णय के लिए धन्यवाद दिया।हालांकि, समाज के एक बड़े वर्ग का मानना है कि केवल नाम परिवर्तन ही शिक्षा व्यवस्था की सभी समस्याओं का समाधान नहीं है। छात्रों और अभिभावकों की सबसे बड़ी चिंता शिक्षा की गुणवत्ता, समय पर परीक्षाएं, निष्पक्ष मूल्यांकन तथा पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाना है। उनका कहना है कि यदि विश्वविद्यालयों और शैक्षणिक संस्थानों में पारदर्शिता, जवाबदेही और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित नहीं की जाती, तो नाम परिवर्तन का वास्तविक लाभ छात्रों तक नहीं पहुंच पाएगा।कई अभिभावक अपने बच्चों की उच्च शिक्षा के लिए आर्थिक कठिनाइयों का सामना करते हैं। अनेक परिवार कर्ज लेकर, जमीन गिरवी रखकर या अपनी वर्षों की जमा-पूंजी खर्च करके बच्चों को पढ़ाते हैं। ऐसे में यदि परीक्षाओं में गड़बड़ियां, पेपर लीक या प्रशासनिक अव्यवस्थाएं होती हैं, तो सबसे अधिक नुकसान छात्रों और उनके परिवारों को उठाना पड़ता है।चंद्रशेखर तिवारी ने यह भी कहा कि प्रदेश में जिन स्थानों के नाम विदेशी आक्रांताओं अथवा शासकों से जुड़े हैं, उनके नाम बदलकर राष्ट्रभक्तों, क्रांतिकारियों और स्थानीय महापुरुषों के नाम पर रखे जाने चाहिए। उन्होंने जहांगीराबाद, शाहजहानाबाद और अब्दुल्लागंज जैसे क्षेत्रों के नाम परिवर्तन की मांग भी दोहराई।इसके साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री से मांग की कि जब हबीबगंज रेलवे स्टेशन का नाम बदलकर रानी कमलापति स्टेशन किया जा चुका है, तो हबीबगंज थाना का नाम भी बदलकर रानी कमलापति थाना रखा जाना चाहिए।विशेषज्ञों और नागरिकों का मानना है कि सांस्कृतिक पहचान और ऐतिहासिक सम्मान महत्वपूर्ण हैं, लेकिन इसके साथ-साथ शिक्षा व्यवस्था में सुधार, पेपर लीक पर सख्त नियंत्रण, समय पर परिणाम, बेहतर शिक्षण व्यवस्था और छात्रों के हितों की सुरक्षा भी उतनी ही आवश्यक है। तभी नाम परिवर्तन जैसे निर्णयों का सकारात्मक प्रभाव समाज और विद्यार्थियों के भविष्य पर दिखाई देगा।