संचिता सुषमा वाल्के 

आज विश्व पर्यावरण दिवस है। हर वर्ष इस दिन हम प्रकृति संरक्षण, हरियाली बढ़ाने और पर्यावरण बचाने के संकल्प लेते हैं। सरकारें और संस्थाएँ "एक पेड़ माँ के नाम" जैसे अभियान चलाकर लोगों को वृक्षारोपण के लिए प्रेरित करती हैं। यह एक सकारात्मक पहल है, जिसका उद्देश्य लोगों को प्रकृति से जोड़ना है। लेकिन इसी के साथ एक महत्वपूर्ण प्रश्न भी खड़ा होता है—क्या नए पौधे लगाने के नाम पर वर्षों पुराने हजारों पेड़ों को काटना उचित है?हाल के दिनों में राजधानी भोपाल में अयोध्या बायपास क्षेत्र में बड़ी संख्या में पेड़ों की कटाई को लेकर नागरिकों, पर्यावरण प्रेमियों और सामाजिक संगठनों ने चिंता व्यक्त की। अनेक लोगों ने इसे केवल पेड़ों की कटाई नहीं, बल्कि शहर की हरित विरासत को नुकसान बताया। इसी चिंता के चलते नागरिकों द्वारा पेड़ों को श्रद्धांजलि देकर पर्यावरण संरक्षण की मांग उठाई गई।पेड़ केवल लकड़ी का स्रोत नहीं होते। एक परिपक्व वृक्ष दशकों में तैयार होता है और वह ऑक्सीजन, छाया, भूजल संरक्षण, जैव विविधता तथा तापमान नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। एक बड़ा वृक्ष जिस पर्यावरणीय सेवा को प्रदान करता है, उसकी भरपाई केवल एक नया पौधा लगाकर तुरंत नहीं की जा सकती। एक पौधे को उस स्तर तक पहुँचने में वर्षों लग जाते हैं।विकास आवश्यक है। सड़कें, पुल, मेट्रो और अन्य बुनियादी सुविधाएँ किसी भी शहर की प्रगति के लिए महत्वपूर्ण हैं। लेकिन विकास और पर्यावरण को आमने-सामने खड़ा करना दूरदर्शी नीति नहीं हो सकती। आज दुनिया भर में ऐसे मॉडल अपनाए जा रहे हैं जहाँ विकास परियोजनाओं को इस प्रकार डिज़ाइन किया जाता है कि पर्यावरणीय क्षति न्यूनतम हो। जहाँ पेड़ों की कटाई अपरिहार्य हो, वहाँ वैज्ञानिक पुनर्वनीकरण, पारदर्शी पर्यावरणीय मूल्यांकन और दीर्घकालिक संरक्षण की व्यवस्था सुनिश्चित की जाती है।विश्व पर्यावरण दिवस हमें यह याद दिलाता है कि धरती केवल वर्तमान पीढ़ी की नहीं, आने वाली पीढ़ियों की भी धरोहर है। यदि हम लाखों पेड़ काटकर केवल प्रतीकात्मक वृक्षारोपण तक सीमित रह जाएँ, तो पर्यावरण संरक्षण का उद्देश्य अधूरा रह जाएगा। आवश्यकता इस बात की है कि विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन स्थापित किया जाए, ताकि शहर भी आगे बढ़े और प्रकृति भी सुरक्षित रहे।आज समय की मांग है कि हम केवल पेड़ लगाने की बात न करें, बल्कि वर्षों से खड़े वृक्षों को बचाने की भी उतनी ही गंभीरता से कोशिश करें। क्योंकि पर्यावरण की रक्षा केवल नए पौधे लगाने से नहीं, बल्कि मौजूदा हरियाली को संरक्षित रखने से भी होती है।

पर्यावरण बचाइए, भविष्य बचाइए।
विकास और प्रकृति—दोनों साथ चलें, तभी सच्ची प्रगति संभव है।