भक्तों को चावल के दानों में दर्शन देते हैं भगवान श्रीनाथजी
नाथद्वार में स्थित भगवान श्रीनाथजी का चमत्कारी मंदिर है। यह मंदिर कई चमत्कारी कहानियों के लिए जाना जाता है। माना जाता है कि श्रीनाथजी खुद भगवान विष्णु के अवतार हैं। पौराणिक मान्यता है कि जब भगवान श्रीकृष्ण सात साल के थे, तब वह यहां पर विराजमान हो गए थे। इस दौरान मंदिर में मौजूद श्रीकृष्ण की काले रंग की मूर्ति को एक पत्थर से तराशा गया है। वहीं यह अपने आप में हैरान कर देने वाली चीज है। यहां भगवान भक्तों को चावल के दानों में दर्शन देते हैं। इसलिए श्रद्धालु अपने साथ चावल लेकर जाते हैं। दर्शन के बाद श्रद्धालु इन चावलों को अपनी तिजोरी में रखते हैं, जिससे कि घर में धन कमी न हो।
उस समय श्रीनाथजी की मूर्ति जोधपुर के पास चौपासनी गांव में थी। चौपासनी गांव में कई समय तक बैलगाड़ी में श्रीनाथजी की मूर्ति की पूजा होती रही। हालांकि अब यह गांव जोधपुर का हिस्सा बन गया है। वहीं जिस जगह ये बैलगाड़ी खड़ी थी, वहां पर श्रीनाथजी का मंदिर बना है। कोटा से करीब 10 किमी दूर श्रीनाथजी की चरण पादुकाएं उसी दौरान आज तक वहीं रखी हुई है। इस स्थान को चरण चौकी के नाम से जानते हैं।
मंदिर से जुड़े नियमों के मुताबिक सर्दियों में प्रभु श्रीनाथजी को उठाकर भोग लगाया जाता है। वहीं रात में प्रभु को सुलाने के लिए कवियों के पदों का गान किया जाता है। श्रीनाथजी के शयनानन्तर तक बीन भी बजाई जाती है। वहीं गर्मी में उनके लिए पंखे की सेवा की जाती है। वहीं सर्दियों में उनको ठंड से बचाने के लिए श्रीनाथजी की मूर्ति के पास अंगीठी रखी जाती है।

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