‘लोकतंत्र में आवाज दबाने नहीं देंगे’: ममता बनर्जी ने केंद्र व भारतीय चुनाव आयोग को घेर
कोलकाता । बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग पर तीखे प्रहार किए हैं। एक बांग्ला समाचार चैनल को दिए एक विशेष साक्षात्कार में मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि बंगाल की अस्मिता और जनता के अधिकारों के लिए वह सडक़ से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक की लड़ाई लड़ने को तैयार हैं। ममता बनर्जी ने एसआइआर और मतदाता सूची से जुड़े विवादों पर गहरी नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने आरोप लगाया कि राच्य के लगभग 58 लाख लोगों के नाम मतदाता सूची के ड्राफ्ट से हटाए जाने की साजिश रची गई है।
लोकतंत्र है, तानाशाही नहीं
मुख्यमंत्री ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के कामकाज के तरीके पर सवाल उठाते हुए कहा कि क्या एक संवैधानिक संस्था को महिलाओं और गरीबों को इस तरह अपमानित करने का अधिकार है? यह लोकतंत्र है, तानाशाही नहीं। उन्होंने इसे बंगाल को वंचित करने की गहरी साजिश करार दिया। ममता ने कहा कि वह मतदाता सूची और अन्य संवैधानिक मुद्दों को लेकर खुद सुप्रीम कोर्ट जाएंगी और दिखाएंगी कि जमीनी स्तर पर क्या चल रहा है। केंद्र की भाजपा सरकार की आलोचना करते हुए उन्होंने कि यह सिर्फ आम लोगों को परेशान करती है। बंगाल से सौतेला व्यवहार करती है।
देवेगौड़ा व वीपी सिंह की प्रशंसा की
साक्षात्कार के दौरान बंगाल की मुख्यमंत्री ने पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा, वीपी सिंह व राजीव गांधी की भूरि भूरि प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि वीपी सिंह व राजीव गांधी उन्हें काफी प्यार करते थे। मैं भी दोनों का काफी सम्मान करती थी। पड़ोसी देश बांग्लादेश में हालिया राजनीतिक उथल-पुथल पर ममता ने साफ किया कि बंगाल की सीमाओं की सुरक्षा और राज्य के हितों से कोई समझौता नहीं होगा।

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