पिल्लों के जन्म पर बारह संस्कार कराए और पूरे गांव को भोजन कराया, ढोल ढमाके भी बजे
हमीरपुर। उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले के विदोखर पुरई गांव में एक अनोखा नजारा देखने को मिला। पालतू डॉगी के पांच पिल्लों के जन्म पर मालिक ने इंसानी बच्चे की तरह पूरा बारहों संस्कार कराया और पूरे गांव-रिश्तेदारी को दावत दी। शुक्रवार रात ढोल-नगाड़ों की गूंज और सोहर गीतों के बीच यह उत्सव देर रात तक चलता रहा।
गांव निवासी रामबाबू सोनी की पालतू डॉगी श्रीदेवी ने 12 दिन पहले पांच प्यारे पिल्लों को जन्म दिया था। खुशी में रामबाबू ने किसी कंजूसी को जगह नहीं दी। शाम को बारहों संस्कार की रस्म शुरू हुई। महिलाएं पारंपरिक सोहर गातीं और ढोल की थाप पर नाचती रहीं। ग्रामीण, पड़ोसी और दूर-दराज के रिश्तेदार बड़ी संख्या में पहुंचे। चाय-नाश्ते के बाद स्वादिष्ट भोजन परोसा गया। लोग हैरान थे कि कुत्ते के बच्चों के लिए भी इतना बड़ा आयोजन हो सकता है, लेकिन रामबाबू की मेहमाननवाजी देखकर सब मुस्कुराते रहे। यह अनोखा बारहों संस्कार अब पूरे इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है।
इधर, गोरखपुर के पिपराइच में एक और दिल छू लेने वाली कहानी सामने आई है। आशीष वर्मा के पालतू कुत्ते ‘चोकी’ ने वफादारी की मिसाल कायम कर दी। पिछले साल आशीष के पिता की अचानक मौत के बाद चोकी गम में घर से गायब हो गया था। परिवार ने दो महीने तक उसे ढूंढ़ा, लेकिन कोई पता नहीं चला। दस महीने बाद जब आशीष अपनी पत्नी सोना देवी की डिलीवरी कराने बीआरडी मेडिकल कॉलेज पहुंचे, तो अचानक चोकी उनके सामने आ गया। 20 किलोमीटर दूर से भटककर आए चोकी ने मालिक को देखते ही दुम हिलानी शुरू कर दी और पास आकर लिपट गया।
परिवार में उस दिन दोहरी खुशी का माहौल था – एक तरफ चोकी का मिलना, दूसरी तरफ घर में नई मेहमान (बेटी) का आगमन। चोकी की वफादारी देखकर अस्पताल में मौजूद हर शख्स भावुक हो गया।

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